भोजन का इतिहास

 यह तो हम सब जानते  हैं कि आदिकाल में मनुष्य शिकार क्र अपना पेट भरता था. कैसे हमारे पूर्वजों ने पका के खाना खाना सीखा होगा? क्या आपने कभी सोचा है कि सब से पहले खाना किस ने बनाया होगा और क्या? आखिर आज जो हम अपनी रसोइयों मैं ढेरों गैजेट्स के साथ तरह तरह के पकवान बनाते हैं, उस यात्रा की शुरुआत किस ने की होगी ? 

सच में  अगर हम में  से किसी ने हज़ारों वर्ष  पहले खाना पकाने की शुरुआत न की होती तो क्या पता हम यहाँ तक आ भी पाते या नहीं.  पर एक बात तो है कि अगर इंसान ने आग का आविष्कार न किया होता तो सोचिये जो दाल मखनी , कढ़ाई पनीर  या मुर्ग मुस्सलम उँगलियाँ चाट चाट कर हम लोग आज खा रहे है वह न हो पाता। 

यह तो हम जानते ही हैं कि Humans को Homo  sapiens भी कहा जाता है. पर क्या आप जानते हैं कि जब तक हम ने खाना पकाना न सीखा था , हम Homo erectus हुआ करते थे। 

खाना पकाने की कला ने जैसे हमें civilized यानी सभ्य बना दिया. आग का आविष्कार मानव उत्थान की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. पर इस जब तक हम ने आग यानि फायर पर काबू पाना नहीं सीखा था हम जंगलो से घास फूस , फल, अथवा बीज खा के ही जीवन यापन कर रहे थे। आग पर काबू पाना जैसे भोजन के इतिहास में सब से महत्वपूर्ण कदम था। उन दिनों हमारा शरीर आज के मुकाबले बहुत बड़ा था  जब कि मस्तिक्ष बहुत छोटा हुआ करता था। दरअसल  हमारा शरीर हमारी प्राथमिकतायों के अनुरूप प्रतिबिंबित होता जाता है। मानव जाती  उस समय मानो अपने दो पैरों पर अपना मोटा सा पेट लिए घूमती थी , हालाँकि अच्छा खाना क्या है, यह पता ही नहीं था. 

लगभग  1.7 million साल पहले हम ने आग पर काबू पाना सीख लिया था।  बस फिर क्या था.आग को काबू में  करते ही धीरे धीरे हमारे पूर्वज स्वादिष्ट खाना बनाना सीखते गए  और हमारा कैलोरी इन्टेक बढ़ता गया. अब इस एक्स्ट्रा कैलोरीज से हमारा दिमाग विकसित  होता गया. क्या आप जानते हैं की हमारे भोजन का एक चौथाई भाग हमारा मस्तिष्क प्रयोग में  लाता है. We literally are what we eat.

आग के आविष्कार के बाद भी हमारे पास भोजन का कोई steady source  नहीं था. उस समय मनुष्य हमेशा जानवरों के पीछे भाग कर उन्हें पकड़ने में ही  लगा रहता था। हम पचाने में कम ऊर्जा  लगा रहे थे और शिकार करने में  ज़्यादा. उस समय के जलवायु इस तरह के खानाबदोश जीवन के लिए उपयुक्त थी। ग्लोबल आइस ऐज  के ज़माने थे हम वहां वहां जाते थे जहाँ हमें भोजन मिलने की सम्भावना होती थी. अगर statistically बात करें तो ५०००  एकर्स केवल एक सदस्य का पेट भरने के लिए काफी था. जैसे जैसे  मनुष्य खेतीबाड़ी करना सीखता  गया तो ५००० एकर्स से ५००० लोगों का पेट भरा जाने  लगा . खेती ने हमें इस यायावरी जीवन से निजात दिलाई. और हम एक स्थान पर रहने लगे।

 “Civilization occurs when something we never missed before becomes a necessity.”~Maguclonne Toussaint-Samat

मानव इतिहास में यह पहला अवसर था जब हम सभी को अपना पेट भरने के लिए सीधे सीधे प्रयास करने की आवशयकता नहीं थी. खेती से मानव जाती की सब से बड़े चैलेंज - यानी पेट भरने की दौड़भाग  से निजात  पा गए  थे . और भोजन अब उपलब्ध भी रहने लगा था.  भोजन की भागदौड़ से  छुटकारा सा मिल  गया था। इस से यह हुआ की अब लोगों के पास समय बचने लगा. वह नयी विधाओं को विकसित करने में लग गए। कुछ  आर्टिस्ट बन सकते थे चिंतन कर सकते थे. एक तरह से कहें तो मानव समाज अपने  ज्ञान वर्धन में लग गया । सिम्पली कहें तो खेती की वजह से ही मानव समाज में उत्थान   हुआ. विज्ञान, भाषा, मैथमेटिक्स, सोशियोलॉजी, साइकोलॉजी इतियादी अनेक विधाओं का विकास हुआ. 

धीरे धीरे हम ने अपना खाना preserve करना सीखा।  और फिर हम ने पीना 🥂सीखा. कैसे हुआ होगा यह सब?शायद  लाखों अरबों  साल पहले एक सुस्त आदमी ने , औरत भी हो सकती है भाई।  अब इस मुद्दे पर कोई वीमेन कमीशन ने बैठ जाए. तो मैं बात कर रही थी, एक सुस्त मानव की. उस ने कहीं कोई फल सड़ने के लिए छोड़ दिया. एक साहसी व्यक्ति, जिस की हो सकता है सूंघने की शक्ति बहुत अच्छे से डेवेलप नहीं थी और उसे फेरमेंटशन /सड़ने की बदबू का पता नहीं लगा और उस ने वह फर्मेन्टेड फ्रुटी ड्रिंक पी ली। अब इस फर्मेन्टेड ड्रिंक पीने का बाद इन महानुभाव ने अपने आसपास शायद कुछ हुड़दंग मचाया होगा . पर वह काफी खुश भी लग रहा था।  ज़रूर उस से बाकी लोगों ने पुछा होगा - यार क्या पिया तुमने?

Fermentation is extremely ancient. 

अगर मैं अपनी इमेजिनेशन के हिसाब से चलूँ तो फर्मेन्टेड अल्कोहलिक ड्रिंक पी कर सभी को मज़ा आने लगा.  पानी सभी की ज़रुरत है. यूँ ही नहीं कहते कि पानी जीवन का आधार है। पर प्रदूषित पानी बिमारियों का घर है. शुरुआती वक़्तों की वाइन दरअसल एक mildly फर्मेन्टेड पेय पदार्थ ही था जो humans  को hyderate करने के लिए ज़्यादा इस्तेमाल होता था. 

ऐसा माना  जाता है कि  रोमन  साम्राज्य के काल ही में  फेरमेंटशन, smoking , salting यानी नमक का प्रयोग  सब विकसित हुआ होगा. आखिर बिना रेफ्रिजरेशन के रोम की सेना के पेट को  कैसे भरा जाता होगा? Roman empire के पास एक बहुत ही विशाल सेना हुआ करती थी. जो दूर सुदूर अपना राज्य बढ़ाने के लिए लड़ाईयों पर जाती रहती थी। अब इतनी बड़ी सेना का पेट पालने के लिए नयी नयी विधाएँ विकसित हो रहीं थी।  उन में  से एक थी पिकलिंग यानी अचार डालना।

यह तो हम जानते ही है की preservation द्वारा हम सीजनल फ्रूट्स एंड वेजटेबल्स का स्वाद उन के सीजन के बाद भी ले सकते हैं।  और तो और आराम से उन्हें अपने साथ घूमने में  भी इस्तेमाल कर सकते हैं. इसी तरह से धीरे धीरे हमारे पूर्वज 

अब जैसे जैसे हम civilized  होते गए, हम अपने से दूर दराज़ की जगहों को खोजने के लिए निकलने लगे. तो इन अभियानों से कैसे हुआ फ़ूड फ्यूज़न? जानना चाहेंगे? यह सब होगा पेटपूजा डॉट कॉम के अगले पोस्ट में। 

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